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आयुआहार प्रस्तुत

नमस्कार वैद्यमित्रो, आशा है आप सभी स्वस्थ हो और समाज के स्वास्थ्य के प्रति आप की सेवा निरंतर कार्यरत हैI

मित्रों, संशोधन यह किसी भी चिकित्सा शास्त्र का शाश्वत भाग है और रहना भी चाहिए I कुछ सालों से आयुर्वेद में संशोधन की आवश्यकता सर्वश्रुत हो ही गई है और यह आयुर्वेद को साबित करने के लिए नहीं, तो आयुर्वेद को स्थापित करने के लिए जरूरी हैI

भाग्य कहे या दुर्भाग्य कहें आयुर्वेद में वैद्यों को ही चिकित्सा में एवं औषधियों में संशोधन करना अनिवार्य हैI और दोनों क्षेत्र में जो चिकित्साशास्त्र प्रमाण सहित सिद्ध है उसे ही प्रगत चिकित्सा शास्त्र माना जाता हैI

आज काफी सारे पाश्चिमात्य औषधियों का चिकित्सकीय दृष्टया प्रमाणीकरण (Perticular clinical evidences) ना होते हुए भी वह कोरोना के चिकित्सा के लिए मान्य है क्योंकि उनका औषधि के परिप्रेक्ष्य में (Pharmaceutical) एवं गुणों के परिप्रेक्ष्य में (Pharmacological) निश्चित प्रमाणीकरण उपलब्ध है, और यही चीज आयुर्वेद के औषधियों में उपलब्ध नहीं है इसीलिए उनका कोरोना की चिकित्सा के लिए प्रयोग सर्वसम्मित नहीं हैI

आयुर्वेदिक सिद्धांतों का शाश्वतत्व निर्विवाद है, उसका प्रचार, प्रसार, शिक्षण, वैद्यकीय सेवा यह सब अपनी अपनी जगह सही है और अपने क्षेत्र में आवश्यक भी है लेकिन इनको अगर संशोधन का योग्य आधार मिले तो यह कार्य और भी अधिक प्रभावशाली एवं सुकर और बहुश्रुत हो सकते हैं I

आज का चिकित्सकीय युग श्रद्धा और भावनाओं पर नहीं तो उसके साइंटिफिक डाक्यूमेंट्स के ऊपर ही विश्वास करता हैI और जो चिकित्सा शास्त्र हजारों वर्षों से शाश्वतता के कारण अपने अस्तित्व को टिकाए हुए हैं क्या उसको एक अलग साइंटिफिक कहीं जाने वाली भाषा में प्रकटीकरण करना मुश्किल है? बिल्कुल भी नहीं, समय की मांग को देखते हुए यह शिवधनुष्य अब आयुर्वेदिक वैद्य को ही उठाना जरूरी है I

इसी को देखते हुए हम कुछ वैद्यों ने मिलकर श्री ब्रह्मचैतन्य आयुर्वेद इस उपक्रम की शुरुआत की थी I औषधियों के क्षेत्र में हमने काफी सफल मार्गक्रमण किया I

पिछले कुछ सालों में जब आयुर्वेद के नाम पर बिकने वाले विभिन्न आहार्य उत्पादों को देखा तब लगा की असली आयुर्वेदिक आहार जो अपने चिकित्सा का विशेष पहलू है, उसके ऊपर काम करना बहुत ज्यादा जरूरी है क्योंकि जिस वस्तू की प्रोडक्ट या रिमेडी के रूप में उपलब्धता होती है उसी का ब्रांड बनता है और लोगो या रुग्ण द्वारा निश्चित उपयोग होता रहता है I तब हमने विश्व का सबसे पहला केवल आयुर्वेदिक फूड ब्रांड आयु-आहार की स्थापना की I इसमें हमने आयुर्वेदिक यूष, मंड, पेया, विलेपी और ब्रह्मरक्षा जैसे आयुर्वेदिक सुपर हेल्थ ड्रिंक उत्पादों का निर्माण किया इन सभी उत्पादों को वैद्य वर्गों ने काफी सराहा और रुग्ण को भी इससे काफी सुकरता हुई और असली आयुर्वेद आहार का सही पालन हुआ I

इसी कड़ी में आज के इस पावन दिन पर हम एक और आयुर्वेदिक आहार के उत्पादन को वैद्यों को समर्पित कर रहे हैं I

ब्रह्मसत्तू यह एक आयुर्वेदिक यव या बार्ली से बनाया हुआ सत्तू है I चरकोक्त संतर्पनीय, एवं भैषज्य रत्नावली मे वर्णित विविध यवसत्तू, व्योषाद्य सत्तू  इन्हींकाही यह किंचित सुधारित एवं संशोधित योग है जो अत्यंत स्वादिष्ट एवं उपयोगी हैI

ब्रह्मसत्तू, दीपनिय, ऊर्जादायक, मेदोहर एवं क्लेदहर हैं I इसका उपयोग संतर्पनजन्य व्याधियों में मुख्यतः किया जाता हैI स्थूलता, प्रमेह एवं PCOS जैसे विकारों में यह बहुत प्रभावशाली आहार हैं जो शरीर के अतिरिक्त मेद एवं  क्लेद को कम करता हैं I इसके बारे मे अधिक जानकारी हमारे ब्लॉग्स द्वारा आपको मिलती ही रहेगी I

आशा हैं आपको यह उत्पाद सराहनीय और उपयोगी साबित होगा जिससे आपके आयुर्वेदिक चिकित्सा में मदद एवं सफलता मिलेगी और आयुर्वेद आहार सही मायने में प्रस्थापित होने में सहाय्यता होगी I

 

धन्यवाद..!!

आपका

वैद्य सारंग देशपांडे, वैद्य श्रीरंग छापेकर, वैद्य सायली जोगळेकर-जोशी, डॉ. अर्चना देशपांडे

CMD (श्री ब्रह्मचैतन्य आयुर्वेद)

 

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